Saturday, 31 May 2014

सुबह सुबह



आज कुछ हुआ जो मुझे पता नहीं चला,
मै निकला था सुबह टहलने को
चलते चलते एकदम से रुक पड़ा
लगा दूर् से किसी ने बुलाया.
पर आवाज़ नजरअंदाज कर बढ़ चला,
पर फिर उसी आवाज़ को सुन रुक गया,
और जिज्ञासा बढ़ी तो कदम थम गये
मन उस आवाज़ कि ओर भागने लगा
मस्तिष्क कल्पनाओ में खो गया.
हर कल्पनाये कि पर कुछ समझ नही आया
और कोई निकट दिखा भी नही
फिर लगा जिसे मै सोच रहा था
शायद उसी की आवाज़ थी,
पर जिसे आप याद करे
वो यूहीं तुरंत क़रीब आ जाता है क्या??.
शायद आज मैंने ही प्रयोग कर दिया.
और ख़ुद पर ही..:) :)


शुभ रात्रि
धीरज मिश्रा