चलो फिर से एक बार शुरू से शुरु करते ,
इस बार कुछ अलग करके देखते हैं ।
शायद इस बार कहीं बात बन जाये ,
शायद इस बार कुछ जवाब मिल जाएँ।
शायद इस बार कुछ तशल्ली मिल जाये,
फिर से अपनी किस्मत आजमा के देखतें,
कुछ और पाशे फेंक कर देखते हैं।
शायद इस बार कुछ नंबर हमारे तरफ आ जाएं,
शायद इस बार चेहरे पे अलग मुश्कान आ जाये ।
और अगर नही भी आया कुछ तो भी क्या रोना,
वैसे भी कौन सा हम जीत गए थे ।
क्या कहते हो... लें लें एक और अवसर ??
धीरज मिश्र